जर्मन कंपनी में फर्जी नौकरी का झांसा देकर ठाणे के व्यक्ति से 12.67 लाख रुपये की ठगी
ठाणे के एक 55 वर्षीय व्यक्ति ने एक प्रतिष्ठित जर्मन कंपनी से जुड़ी फर्जी नौकरी के प्रस्ताव के नाम पर कथित साइबर ठगी में ₹12.67 लाख गंवा दिए। भर्ती अधिकारियों का रूप धारण कर ठगों ने अलग-अलग चरणों में भुगतान मांगा, लेकिन उन्हें न नौकरी मिली और न नियुक्ति पत्र।

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1. पीड़ित की पृष्ठभूमि
ठाणे जिले के 55 वर्षीय विशाल प्रमोद नौकरी के नए अवसर की तलाश में थे। करियर में आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान उन्हें एक प्रसिद्ध जर्मन बहुराष्ट्रीय कंपनी से जुड़ी नौकरी का प्रस्ताव मिला। हालांकि, बाद में यह प्रस्ताव साइबर ठगी का माध्यम साबित हुआ।
2. ठगी की घटनाओं का क्रम
फरवरी से अप्रैल तक लगभग तीन महीने की अवधि में कुछ लोगों ने फोन और ऑनलाइन माध्यमों से प्रमोद से संपर्क किया। उन्होंने खुद को एक प्रसिद्ध जर्मन कंपनी का भर्ती अधिकारी बताते हुए प्रमोद को कंपनी में एक पद के लिए चयनित होने का विश्वास दिलाया। इसके बाद उन्हें भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरण पूरे करने के लिए कहा गया। इस प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग कारणों से उनसे ऑनलाइन पैसे मांगे गए। प्रमोद ने किस्तों में पैसे ट्रांसफर किए और अंततः कुल 12,67,135 रुपये गंवा दिए। हालांकि, उन्हें न तो नौकरी मिली और न ही नियुक्ति पत्र। ठगी का पता चलने के बाद प्रमोद ने 20 जुलाई को कल्याण के बाजारपेठ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पायल शर्मा, अनुज कुमार और श्रीकांत ढवपंती के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और मामले की जांच जारी है।
3. ठगी के लिए अपनाई गई कार्यप्रणाली
साइबर अपराधियों ने एक फर्जी भर्ती प्रक्रिया तैयार की और उसे आधिकारिक दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने एक प्रतिष्ठित जर्मन कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर नौकरी के प्रस्ताव को विश्वसनीय बनाने की कोशिश की। एक साथ बड़ी रकम मांगने के बजाय, पैसे को भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से जोड़ दिया गया। भर्ती, प्रशिक्षण और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर किस्तों में रकम मांगी गई, जिससे हर भुगतान अलग मांग न लगकर उसी प्रक्रिया का हिस्सा प्रतीत हुआ। पूरी बातचीत फोन और ऑनलाइन माध्यमों से हुई। पीड़ित को न तो आमने-सामने मिलने का अवसर मिला और न ही कंपनी के कार्यालय जाकर स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने का मौका मिला।
4. साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए गए भावनात्मक हथकंडे
इस ठगी में अच्छी नौकरी, आर्थिक स्थिरता, प्रतिष्ठा और करियर में प्रगति की इच्छा का फायदा उठाया गया। एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी का नाम इस्तेमाल करने से नौकरी के प्रस्ताव पर भरोसा पैदा करना आसान हो गया। “प्रशिक्षण”, “दस्तावेज”, “पुष्टि” और “भर्ती प्रक्रिया” जैसे परिचित शब्दों का इस्तेमाल करके पैसों की मांग को सामान्य भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया। पहले से जमा किए गए पैसे बेकार न जाएं और नौकरी का अवसर हाथ से न निकल जाए, इस मानसिक दबाव के कारण पीड़ित आगे की मांगों का जवाब देता रहा।
5. ठगी का प्रभाव
इस मामले में प्रमोद को 12.67 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। इतनी बड़ी रकम गंवाने से उनकी आर्थिक योजना पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। आर्थिक नुकसान के अलावा उन्हें विश्वासघात और मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ सकता है। जिस नौकरी के अवसर को वास्तविक माना गया, उसके पूरी तरह फर्जी होने का पता चलना भावनात्मक रूप से भी झटका दे सकता है। पैसे वापस मिलेंगे या नहीं, इसे लेकर अनिश्चितता इस नुकसान को और बढ़ा सकती है।
6. ऐसी ठगी से सुरक्षित रहने के उपाय
नौकरी का कोई भी प्रस्ताव मिलने पर उसका स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना जरूरी है। कंपनी की आधिकारिक करियर वेबसाइट देखें और कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध संपर्क माध्यम के जरिए सीधे मानव संसाधन (HR) विभाग से संपर्क करें। नौकरी की पेशकश करने वाले व्यक्ति द्वारा दिए गए फोन नंबर या लिंक पर ही निर्भर न रहें। नौकरी के लिए पंजीकरण, प्रशिक्षण, प्रक्रिया या पुष्टि शुल्क मांगा जाए तो सावधान रहें। नियुक्ति पत्र, कंपनी के आधिकारिक लेटरहेड और कंपनी के आधिकारिक ईमेल डोमेन की भी जांच करें। यदि नौकरी का प्रस्ताव संदिग्ध लगे तो तुरंत भुगतान रोक दें। ठगी होने पर (www.cybercrime.gov.in) राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर या 1930 हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को फर्जी लेनदेन को रोकने में मदद मिल सकती है।
तुरंत क्या करें
ठग से संपर्क तोड़ें
कॉल या चैट बंद करें. सामने वाला आधिकारिक या गुस्से में लगे, तब भी बात जारी न रखें.
पैसे गए हों तो 1930 पर कॉल करें
पहला घंटा ट्रांसफर रोकने का सबसे अच्छा मौका देता है.
सबूत बचाएं
लेन-देन आईडी, फोन नंबर, लिंक, स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्ड रखें.
सुरक्षा चेकलिस्ट
- Never share OTPs, PINs, passwords, or screen-sharing access.
- Verify urgent claims using official phone numbers only.
- Talk to a trusted person before moving money under pressure.
- Report suspicious calls and messages quickly.







