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नौकरी के वादे से साइबर अपराध के जाल तक: नोएडा में युवाओं को विदेश भेजकर साइबर ठगी में धकेलने का आरोप

A Noida man was allegedly lured abroad with promises of a high-paying job and later forced to work for a cybercrime syndicate in Myanmar. The case led to the arrest of an alleged recruiter accused of sending Indian youths to Southeast Asian cybercrime networks.

By Cyber Warrior Akash Wagawad/5 मिनट पढ़ें/अपडेट 16 Aug 2026
नौकरी के वादे से साइबर अपराध के जाल तक: नोएडा में युवाओं को विदेश भेजकर साइबर ठगी में धकेलने का आरोप
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नोएडा, जनवरी २०२६: नोएडा के एक निवासी को अच्छी तनख्वाह वाली विदेश में नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड ले जाया गया और बाद में कथित तौर पर म्यांमार पहुंचाकर साइबर अपराध सिंडिकेट के लिए काम करने को मजबूर किया गया। मामले में भारतीय युवाओं को दक्षिण-पूर्व एशिया के साइबर अपराध नेटवर्क तक पहुंचाने वाले कथित भर्ती एजेंट को गिरफ्तार किया गया।

1. पीड़ित की पृष्ठभूमि

नोएडा के सेक्टर 73 निवासी एक व्यक्ति ने विदेश में अच्छी नौकरी मिलने की उम्मीद में एक भर्ती एजेंट से संपर्क किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से थाईलैंड में डेटा-एंट्री की नौकरियों का प्रचार करता था और ₹1.5 लाख से अधिक मासिक वेतन के साथ रहने और भोजन की सुविधा का वादा करता था। शिकायतकर्ता ने कथित नौकरी के लिए ₹80,000 का भुगतान किया और जुलाई 2025 में थाईलैंड पहुंचा। पुलिस के अनुसार, इसके बाद उसे म्यांमार ले जाया गया और वहां एक साइबर अपराध सिंडिकेट के हवाले कर दिया गया।

2. घटनाओं का क्रम

मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर दिखाई गई विदेशी नौकरी की पेशकश से हुई। पुलिस के अनुसार, उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता था और यात्रा की व्यवस्था के नाम पर ₹80,000 से ₹1 लाख तक की रकम ली जाती थी। थाईलैंड पहुंचने के बाद शिकायतकर्ता को कथित रूप से म्यांमार ले जाया गया। वहां उसे साइबर ठगी करने वाले एक नेटवर्क के लिए काम करने के लिए मजबूर किए जाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, उससे फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के माध्यम से लोगों से संपर्क कराया जाता था। इसके बाद उसे ऑनलाइन ठगी की गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। नवंबर 2025 में भारतीय और दक्षिण-पूर्व एशियाई एजेंसियों के समन्वित अभियान के दौरान उसे बचाया गया। भारत लौटने के बाद उसने नोएडा साइबर पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने कम से कम छह भारतीय युवाओं को विदेश भेजा था और जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल थे।

3. साइबर अपराधियों द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली

इस मामले में फर्जी भर्ती, मानव तस्करी और जबरन साइबर अपराध में शामिल करने का कथित संयोजन सामने आया है। शुरुआत में सोशल मीडिया पर आकर्षक विदेशी नौकरी, ऊंचे वेतन और सुविधाओं का वादा करके भरोसा बनाया गया। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद शिकायतकर्ता के साथ कथित रूप से बिल्कुल अलग व्यवहार किया गया। पुलिस के अनुसार, उसे म्यांमार ले जाकर ऑनलाइन ठगी के काम में लगाया गया। उससे Facebook, Instagram और Tinder जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से लोगों से संपर्क कराया जाता था और उनका विश्वास जीतकर उन्हें कथित धोखाधड़ी वाली निवेश या ऑनलाइन योजनाओं की ओर ले जाने का काम कराया जाता था।

4. भावनात्मक कारकों का दुरुपयोग

इस कथित भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक स्थिरता और विदेश में नौकरी पाने की इच्छा का फायदा उठाया गया। ₹1.5 लाख से अधिक मासिक वेतन और अन्य सुविधाओं का वादा नौकरी को आकर्षक और विश्वसनीय बना सकता था। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद शिकायतकर्ता को कथित रूप से शारीरिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। यह मामला दिखाता है कि नौकरी का प्रस्ताव कितना भी आकर्षक क्यों न हो, यदि व्यक्ति की स्वतंत्रता, संपर्क या आवाजाही पर नियंत्रण किया जाने लगे तो यह गंभीर खतरे का संकेत है।

5. प्रभाव

यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला सामान्य नौकरी का विज्ञापन भी गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधी नेटवर्क तक पहुंचने का माध्यम बन सकता है। शिकायतकर्ता ने ₹80,000 का भुगतान किया और नौकरी की उम्मीद में विदेश गया, लेकिन पुलिस के अनुसार उसे साइबर ठगी में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। आरोपी द्वारा कम से कम छह युवाओं को विदेश भेजे जाने की बात सामने आई है और व्यापक नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया है और उसके बैंक खातों की जांच की जा रही है ताकि भुगतान तथा विदेशी नेटवर्क से उसके संबंधों का पता लगाया जा सके।

6. ऐसी ठगी से सुरक्षित रहने के उपाय

1. विदेशी नौकरी की स्वतंत्र जांच करें। सिर्फ Instagram, WhatsApp या भर्ती एजेंट द्वारा दिए गए लिंक पर भरोसा न करें। 2. बड़ी भर्ती या यात्रा फीस से सावधान रहें। नौकरी की पुष्टि से पहले बड़ी रकम मांगी जाए तो उसकी स्वतंत्र जांच करें। 3. नौकरी का वास्तविक स्वरूप समझें। बहुत कम काम के बदले असामान्य रूप से अधिक वेतन देने वाले अस्पष्ट ऑनलाइन या डेटा-एंट्री प्रस्तावों से सावधान रहें। 4. परिवार को पूरी जानकारी दें। कंपनी, एजेंट, देश, यात्रा और रहने की व्यवस्था के बारे में किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जरूर बताएं। 5. नौकरी की शर्तें बदलने पर तुरंत सतर्क हों। यदि आपको तय स्थान से अलग कहीं ले जाया जाए, फोन या दस्तावेज छीन लिए जाएं या नौकरी से अलग काम करने के लिए मजबूर किया जाए, तो इसे गंभीर चेतावनी मानें।

असली पुलिस, बैंक या साइबर सेल आपको निजी वीडियो कॉल पर रुकने, OTP साझा करने या सत्यापन के लिए पैसे भेजने को नहीं कहते.

तुरंत क्या करें

ठग से संपर्क तोड़ें

कॉल या चैट बंद करें. सामने वाला आधिकारिक या गुस्से में लगे, तब भी बात जारी न रखें.

पैसे गए हों तो 1930 पर कॉल करें

पहला घंटा ट्रांसफर रोकने का सबसे अच्छा मौका देता है.

सबूत बचाएं

लेन-देन आईडी, फोन नंबर, लिंक, स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्ड रखें.

सुरक्षा चेकलिस्ट

  • Never share OTPs, PINs, passwords, or screen-sharing access.
  • Verify urgent claims using official phone numbers only.
  • Talk to a trusted person before moving money under pressure.
  • Report suspicious calls and messages quickly.

मूल स्रोत

  1. Hindustan Timeshindustantimes.com
  2. Times of Indiatimesofindia.indiatimes.com
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