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फर्जी जांच, नकली आदेश और “Digital Arrest”; मुंबई के 73 वर्षीय व्यवसायी से ₹7.9 करोड़ की साइबर ठगी

मुंबई के 73 वर्षीय व्यवसायी को दिल्ली पुलिस अधिकारी बनकर ठगों ने फर्जी मनी-लॉन्ड्रिंग जांच में फंसाया। “Digital Arrest”, नकली दस्तावेजों और गिरफ्तारी की धमकी के जरिए उनसे ₹7.9 करोड़ ट्रांसफर कराए गए।

By Cyber Warrior Sanika Jadhav/4 मिनट पढ़ें/अपडेट 16 Aug 2026
फर्जी जांच, नकली आदेश और “Digital Arrest”; मुंबई के 73 वर्षीय व्यवसायी से ₹7.9 करोड़ की साइबर ठगी
प्रचिती की मूल दृश्य प्रणाली से लिया गया उदाहरण चित्र.
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गंभीरता
High
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1930

मुंबई, 21 जुलाई 2026: मुंबई के अंधेरी क्षेत्र में रहने वाले 73 वर्षीय व्यवसायी को दिल्ली पुलिस अधिकारी बनकर फोन किया गया और बताया गया कि उनके नाम का एक बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले से जुड़ा है। इसके बाद उन्हें लगभग दो सप्ताह तक फर्जी पूछताछ और “Digital Arrest” के नाम पर मानसिक दबाव में रखकर करीब ₹7.9 करोड़ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए गए। इस मामले में 21 जुलाई को वेस्ट रीजन साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई।

१. पीड़ित का परिचय

पीड़ित अंधेरी में रहने वाले 73 वर्षीय व्यवसायी हैं और टूर एंड ट्रैवल्स का व्यवसाय चलाते हैं। 5 जुलाई को उन्हें WhatsApp पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि पीड़ित के आधार विवरण का इस्तेमाल एक राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलने के लिए किया गया है और उस खाते में ₹7 करोड़ जमा किए गए हैं। यह भी कहा गया कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।

२. घटनाओं की श्रृंखला

शुरुआती कॉल के बाद पीड़ित को WhatsApp वीडियो कॉल के माध्यम से कथित पूछताछ में शामिल किया गया। उन्हें गिरफ्तारी वारंट जारी करने की धमकी दी गई और मामले की गोपनीयता बनाए रखने के लिए परिवार के किसी सदस्य को इसकी जानकारी न देने के लिए कहा गया।

इसके बाद कथित अधिकारियों ने Enforcement Directorate से संबंधित फर्जी दस्तावेज भेजे। आगे यह दावा किया गया कि मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है और जांच के लिए पीड़ित के म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक जमा राशि को बताए गए खातों में ट्रांसफर करना आवश्यक है। विश्वास कायम करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का फर्जी आदेश भी भेजा गया।

7 से 16 जुलाई के बीच पीड़ित ने छह लेन-देन में लगभग ₹7.9 करोड़ अलग-अलग निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। 18 जुलाई को वेस्ट रीजन साइबर पुलिस के अधिकारी उनके घर पहुंचे और बताया कि वह “Digital Arrest” साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। इसके बाद 21 जुलाई को शिकायत दर्ज की गई।

३. ठगों ने अपनाई यह तकनीक

इस मामले में सरकारी अधिकारियों की पहचान की नकल, फर्जी कानूनी दस्तावेज, WhatsApp वीडियो कॉल और “Digital Arrest” की झूठी अवधारणा का इस्तेमाल किया गया। पहले पीड़ित को गंभीर आर्थिक अपराध में शामिल होने का डर दिखाया गया और फिर “जांच” के नाम पर धन ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

जांच में लगभग 200 “mule bank accounts” के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। ये खाते पांच राज्यों में फैले होने की बात सामने आई है, जिससे धन के प्रवाह को छिपाने और रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया।

४. भावनात्मक दबाव का दुरुपयोग

इस ठगी में तकनीक के साथ-साथ डर और अधिकार की झूठी छवि का इस्तेमाल किया गया। गिरफ्तारी, राष्ट्रीय सुरक्षा और गंभीर वित्तीय अपराध की जांच का डर पैदा कर पीड़ित पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। परिवार से मामला छिपाने के निर्देश देकर उन्हें स्वतंत्र रूप से स्थिति की पुष्टि करने से भी दूर रखा गया।

५. परिणाम

इस घटना में पीड़ित को लगभग ₹7.9 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ। साइबर पुलिस ने धन के प्रवाह की जांच शुरू की और जांच के दौरान लगभग ₹1.1 करोड़ की राशि बरामद या फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई है। शेष राशि का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

६. सुरक्षित रहने के उपाय गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की धमकी मिलने पर घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें। पुलिस, न्यायालय या किसी सरकारी संस्था के अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति की आधिकारिक माध्यम से स्वतंत्र पुष्टि करें। WhatsApp कॉल, वीडियो कॉल या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाली “Digital Arrest” को गंभीर चेतावनी मानें। ऐसी घटना की जानकारी परिवार या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से न छिपाएं। आर्थिक साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करें और National Cyber Crime Reporting Portal — cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

समापन: यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ डर, विश्वास और मानसिक दबाव को भी हथियार बनाते हैं। किसी भी ऑनलाइन कानूनी धमकी के सामने घबराने के बजाय रुकें, सत्यापित करें और आधिकारिक एजेंसी से संपर्क करें।

असली पुलिस, बैंक या साइबर सेल आपको निजी वीडियो कॉल पर रुकने, OTP साझा करने या सत्यापन के लिए पैसे भेजने को नहीं कहते.

तुरंत क्या करें

ठग से संपर्क तोड़ें

कॉल या चैट बंद करें. सामने वाला आधिकारिक या गुस्से में लगे, तब भी बात जारी न रखें.

पैसे गए हों तो 1930 पर कॉल करें

पहला घंटा ट्रांसफर रोकने का सबसे अच्छा मौका देता है.

सबूत बचाएं

लेन-देन आईडी, फोन नंबर, लिंक, स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्ड रखें.

सुरक्षा चेकलिस्ट

  • Never share OTPs, PINs, passwords, or screen-sharing access.
  • Verify urgent claims using official phone numbers only.
  • Talk to a trusted person before moving money under pressure.
  • Report suspicious calls and messages quickly.
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