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फर्जी जॉब एप्लिकेशन लिंक से ₹1.51 लाख की ठगी, गाजियाबाद से आरोपी गिरफ्तार

दिल्लीतील एका महिलेला बनावट जॉब ॲप्लिकेशन लिंकवर क्लिक केल्यानंतर ₹१.५१ लाखांचा आर्थिक फटका बसला. या प्रकरणात पोलिसांनी गाझियाबादमधील एका व्यक्तीला अटक केली.

By Cyber Warrior Siddhalaxmi Pal/4 मिनट पढ़ें/अपडेट 17 Aug 2026
फर्जी जॉब एप्लिकेशन लिंक से ₹1.51 लाख की ठगी, गाजियाबाद से आरोपी गिरफ्तार
प्रचिती की मूल दृश्य प्रणाली से लिया गया उदाहरण चित्र.
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नई दिल्ली, अप्रैल 2026: दिल्ली की एक महिला को नौकरी के आवेदन के नाम पर भेजे गए एक फर्जी लिंक पर क्लिक करना महंगा पड़ा। लिंक के बाद उनका फोन कथित रूप से साइबर अपराधियों के नियंत्रण में चला गया और उनके बैंक खाते से आठ अनधिकृत लेनदेन के जरिए ₹1,51,018 निकाल लिए गए। जांच के दौरान पुलिस ने धन के लेनदेन का पता लगाते हुए गाजियाबाद निवासी 28 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया।

1. पीड़ित की पृष्ठभूमि

पीड़ित दिल्ली के ईस्ट रोहताश नगर क्षेत्र की रहने वाली महिला हैं, जो नौकरी के अवसर की तलाश कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें नौकरी के लिए पंजीकरण करने के उद्देश्य से एक लिंक प्राप्त हुआ।

पहली नजर में यह लिंक नौकरी के आवेदन की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा प्रतीत हुआ। हालांकि, लिंक पर क्लिक करने के बाद उनका फोन कथित रूप से प्रभावित हुआ और इसके बाद उनके बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन किए गए।

2. घटनाओं का क्रम

महिला को उनके मोबाइल फोन पर नौकरी के लिए पंजीकरण करने का निर्देश देने वाला एक लिंक भेजा गया।

लिंक पर क्लिक करने के बाद उनका फोन कथित रूप से साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ गया। इसके बाद उनके बैंक खाते से आठ अनधिकृत लेनदेन किए गए, जिससे उन्हें कुल ₹1,51,018 का आर्थिक नुकसान हुआ।

पीड़ित ने घटना की जानकारी National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से दी। इसके बाद 13 नवंबर 2025 को मामला दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने चोरी की गई रकम में से ₹10,000 का लेनदेन गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी स्थित एक बैंक खाते तक ट्रेस किया। इस वित्तीय सुराग के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची।

पुलिस ने गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी निवासी 28 वर्षीय केशव कुमार कर्ण को गिरफ्तार किया। उसके पास से एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

3. साइबर अपराधियों द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली

इस मामले में नौकरी के आवेदन के नाम पर भेजा गया एक फर्जी लिंक ठगी का माध्यम बना। सीधे पैसे मांगने के बजाय, अपराधियों ने एक सामान्य नौकरी-पंजीकरण प्रक्रिया जैसी स्थिति तैयार की।

लिंक पर क्लिक करने के बाद फोन कथित रूप से प्रभावित हुआ और उसके बाद खाते से अनधिकृत लेनदेन किए गए। जांच में गिरफ्तार आरोपी के बैंकिंग Customer Service Point (CSP) से जुड़े होने और कथित रूप से संदिग्ध लेनदेन में भूमिका की भी जांच की गई।

यह मामला दिखाता है कि साइबर ठगी हमेशा सीधे पैसों की मांग से शुरू नहीं होती। कई बार एक साधारण दिखाई देने वाला लिंक ही पूरे साइबर हमले का शुरुआती माध्यम बन सकता है।

4. भावनात्मक कारकों का दुरुपयोग

इस ठगी में नौकरी पाने की इच्छा और रोजगार से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया पर सामान्य भरोसे का फायदा उठाया गया।

नौकरी की तलाश कर रहे व्यक्ति किसी आवेदन को पूरा करने के लिए लिंक पर क्लिक करना स्वाभाविक समझ सकते हैं। इसी सामान्य व्यवहार का फायदा उठाकर संदिग्ध लिंक को वैध प्रक्रिया का हिस्सा दिखाया जा सकता है।

इसलिए नौकरी से संबंधित किसी भी लिंक, फॉर्म या आवेदन पर कार्रवाई करने से पहले उसके स्रोत की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना आवश्यक है।

5. प्रभाव

इस घटना में पीड़ित को ₹1,51,018 का आर्थिक नुकसान हुआ और उनके बैंक खाते से आठ अनधिकृत लेनदेन किए गए।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने धन के एक हिस्से का पता लगाया और आरोपी को गिरफ्तार किया। मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं तथा मामले में आगे की जांच जारी है।

यह घटना इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि साइबर अपराध का पहला कदम हमेशा संदिग्ध या खतरनाक दिखाई नहीं देता। कभी-कभी एक नौकरी के आवेदन जैसा सामान्य अवसर भी डिजिटल जोखिम का माध्यम बन सकता है।

6. सुरक्षित रहने के उपाय नौकरी के लिए आवेदन हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय जॉब पोर्टल से करें। अज्ञात या असत्यापित स्रोतों से प्राप्त नौकरी संबंधी लिंक पर क्लिक न करें। किसी लिंक को खोलने से पहले उसके स्रोत और वेबसाइट पते की जांच करें। असत्यापित लिंक या फॉर्म के माध्यम से बैंकिंग जानकारी, OTP, PIN या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें। मोबाइल का ऑपरेटिंग सिस्टम और सुरक्षा सुविधाएं अपडेट रखें। खाते में अनधिकृत लेनदेन दिखाई देने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर संपर्क करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें। लिंक, संदेश, फोन नंबर, स्क्रीनशॉट और लेनदेन से जुड़े सभी प्रमाण सुरक्षित रखें।

असली पुलिस, बैंक या साइबर सेल आपको निजी वीडियो कॉल पर रुकने, OTP साझा करने या सत्यापन के लिए पैसे भेजने को नहीं कहते.

तुरंत क्या करें

ठग से संपर्क तोड़ें

कॉल या चैट बंद करें. सामने वाला आधिकारिक या गुस्से में लगे, तब भी बात जारी न रखें.

पैसे गए हों तो 1930 पर कॉल करें

पहला घंटा ट्रांसफर रोकने का सबसे अच्छा मौका देता है.

सबूत बचाएं

लेन-देन आईडी, फोन नंबर, लिंक, स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्ड रखें.

सुरक्षा चेकलिस्ट

  • Never share OTPs, PINs, passwords, or screen-sharing access.
  • Verify urgent claims using official phone numbers only.
  • Talk to a trusted person before moving money under pressure.
  • Report suspicious calls and messages quickly.

मूल स्रोत

  1. Hindustan Timeshindustantimes.com
  2. theprinttheprint.in
  3. milleniumpostmillenniumpost.in
  4. Daily Huntm.dailyhunt.in
  5. ptinewsptinews.com
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